Monday, April 20, 2015

मन में छिपी है असीमित शक्ति ! Post-2

हमारी इंद्रियां मन की दासी हैं। वही करना चाहती हैं, जो मन चाहता है। मन "इंद्र" जैसा है। वह विश्वामित्र की तपस्या भंग करने के लिए ‘मेनका’ को भेजता है। कभी आपने जानने की कोशिश की है कि इंद्र देवता को विश्वामित्र जैसे ऋषि की तपस्या भंग करने की क्या जरूरत थी? यह काम तो राक्षसों का था। इन्द्र तो देवताओं के राजा थे। उनको यह सब करने की क्या जरूरत थी ! इंद्र के ऐसे और भी कई
किस्से हैं, जो उनके देवताओं का राजा होने की गरिमा से मेल नहीं खाते।

ये किस्से गलत नहीं हैं। इनके पीछे गूढ़ रहस्य छिपे हैं। यह मन ही है, जो हमारा ‘ध्यान’ किसी एक बिंदु पर ज्यादा देर टिकने नहीं देता। वह नई-नई इच्छाओं को जन्म देता है। हमारी अत्यधिक इच्छाएं ही हमारी उन्नति में बाधक हैं। हमारी बुनियादी जरूरतों में और अंतहीन इच्छाओं में फर्क है। इच्छाओं की पूर्ति न होना ही हमारे दु:खों का कारण है। इच्छा पैदा भी मन करता है और इच्छा पूर्ति न होने पर  मन ही दु:ख के भाव को जन्म भी देता है। यह गौर करने वाली बात है कि जिसकी जितनी ज्यादा इच्छाएं

Thursday, June 6, 2013

मन के जीते जीत है, मन के हारे हार। Post 1



 Inner Journey यानी अंतर्यात्रा को बयान करती है यह तस्वीर ! तस्वीर के केंद्र में दो आँखें हैं . एक खुली हुई और दूसरी बंद आँख ....उसके चारो ओर घूमती हुई पूरी बाहरी दुनियां है ...प्रकृति  - पेड़ पौधे ,पशु -पक्षी ,धरती, आकाश,समुद्र, जलजीव और पहाड़। दरअसल यह तस्वीर हमें दो तरह अनुभवों के होने का अहसास कराती है . खुली आँख से हम बाहरी जगत का अनुभव करते हैं लेकिन आँख बंद होते ही हम अपने भीतर की यात्रा करते हैं ...अपने भीतर की यात्रा को ही हम आंतरिक यात्रा ( Inner Journey ) कहते हैं।जिस प्रकार हम बाहरी दुनियां को देखते हैं और उसको अनुभव करते हैं, वैसे ही हम अपने भीतर बसी पूरी सृष्टि का भी अनुभव कर सकते हैं।

ब्लोगिंग ...! यह भी  अन्तर्मन के आयामों की बाहरी प्रस्तुति का

Friday, May 31, 2013

PERFECT LOVE

 
No human love can be complete or perfect without God's love. 
No marriage can be lasting or truly fruitful without the catalyst of divine love.
No love is real until it is one with God's love; for all true love comes from God alone. 
Human love, to be divine, must be deep and selfless. 

Purify the heart's love until it becomes divine.

(Paramahansa Yogananda-a spiritual interpretation of The Rubaiyat of Omar Khayyam)

CELEBRATION


Whatever happens in your life, thank each day for for making you stronger by freeing you more and more from limited ways of thinking, from expectations, and from negativity.

Whatever others do is their prerogative, whatever happens is drama. YOU celebrate each day with lightness, laughter and fun

Monday, May 27, 2013

Mere Baba

                                                                                                                                                                            ॐ श्री खप्ति  नाथाए नमः
sadguru shri khptinath Maharaj